Wednesday, 7 May 2014

kuch tho mein piche chod aya...aur aap!

कुछ तो मैं  पीछे छोड़ आया 
तब के कुछ अजीब पर सुन्दर रंग 
आसमां थ लॉ और उड़तीं कोयल हरि 
पर भी था  मनपसंद मेरे 
तपती धुप में खेलते था नंगे पैर
कुछ तो मैं  पीछे छोड़ आया
पैसे थे  कम पर खुशियाँ ज़्यादा
समय था  ज़्यादा ; काम  बहूत  कम 
शाम कि वोह डिज्नी hour सबसे हसींन 
तारों कि नीची बनती  थी कई  नई कहानीयाँ 
कुछ तो मैं  पीछे छोड़ आया
स्कूल की homework थी बहुत ज़रूरी 
वरना अगले दिन पडती थी मार 
वह मिलके एक रूपए क ice cream
कोई match पर थी  पसन्द 
कुछ तो मैं  पीछे छोड़ आया
उन रास्तों पर दोस्तों को  चिढ़ाने खुसी 
फिर छोटी छोटी लड़कपन पर थे बहुत ज़रूरी 
फिर वही दोस्तों  से दोस्ती थी अटूट 
और वह पहली बार लड़की से प्यार 
कुछ तो मैं  पीछे छोड़ आया